farhan ali qadri
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Farhan Ali Qadri - ज़मीं मैली नहीं होती ज़मन मैला नहीं होता
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ज़मीं मैली नहीं होती ज़मन मैला नहीं होता

ज़मीं मैली नहीं होती ज़मन मैला नहीं होता
ज़मीं मैली नहीं होती ज़मन मैला नहीं होता
मुहम्मद के घुलामों का कफ़न मैला नहीं होता
मोहब्बत कमली वाले से वोह जज़्बा है सुनो लोगो
यह जिस मनं मैं समां जाए वोह मनं मैला नहीं होता
मुहम्मद के घुलामों का कफ़न मैला नहीं होता
नबी के पाक लंगर पर जो पलटे हैं कभी उनकी
ज़बान मैली नहीं होती सुखन मैला नहीं होता
मुहम्मद के घुलामों का कफ़न मैला नहीं होता
मेरी आका की उल्फत तो बदन को जगमगाती है
कभी अहल -ए- मुहम्मद का बदन मैला नहीं होता
मुहम्मद के घुलामों का कफ़न मैला नहीं होता
गुलूं को चूम लेते हैं सेहर नम शबनमी कतरे
नबी की नात सुन ले तू चमन मैला नहीं होता
मुहम्मद के घुलामों का कफ़न मैला नहीं होता
जो नाम -ए -मुस्तफा चूमें नहीं दुखती कभी आंखें
पहेन ले प्यार जो उनका बदन मैला नहीं होता
मुहम्मद के घुलामों का कफ़न मैला नहीं होता
मैं नाज़ां तू नहीं फन पर मगर नासिर यह दव्वा है
सना -ए -मुस्तफा करने से फन मैला नहीं होता
मुहम्मद के घुलामों का कफ़न मैला नहीं होता
ज़मीं मैली नहीं होती ज़मन मैला नहीं होता
मुहम्मद के घुलामों का कफ़न मैला नहीं होता


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