farhan ali qadri
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Farhan Ali Qadri - मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते
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मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते

मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते
दीवाने बारवीं की शब् नहीं सोते नहीं सोते
ख्यालों का सफ़र इन को मदीने ले के जाता है
नबी की याद से घाफिल यह इक पल भी नहीं होते
मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते
दीवाने बारवीं की शब् नहीं सोते नहीं सोते
यह जिन के सदके खाते हैं उन्ही के गुण यह गाते हैं
किसी भी ग़ैर के दर पर नहीं झुकते नहीं रोते
मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते
दीवाने बारवीं की शब् नहीं सोते नहीं सोते
इन्हें हसनैन से उल्फत है उनके नाना से उल्फत हैं
पंज्तन पाक के आशिक किसी से यह नहीं डरते
मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते
दीवाने बारवीं की शब् नहीं सोते नहीं सोते
दरूद -ए-पाक पढ़ते हैं सलाम उन को यह करते हैं
यह रहमत पएय जाते हैं तेरी तरह नहीं खोते
मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते
दीवाने बारवीं की शब् नहीं सोते नहीं सोते
ज़रा देखो तो दीवाने पुकारें मरहबा आका
यह उन के जश्न -ए -आमद से कभी ग़ाफिल नहीं होते
मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते
दीवाने बारवीं की शब् नहीं सोते नहीं सोते
दीवानों मैं दीवाना आबिदी भी है यहीं शायद
जो कहता फिर रहा है आज की शब् हम नहीं सोते
मदीने मैं यह होते हैं यहाँ पर यह नहीं होते
दीवाने बारवीं की शब् नहीं सोते नहीं सोते



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