farhan ali qadri
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Farhan Ali Qadri - सिर्फ एक बार सिर्फ एक बार
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सिर्फ एक बार सिर्फ एक बार

सिर्फ एक बार सिर्फ एक बार
दिल से मुस्तफा को तू पुकार होगा बेडा पार
हज़ार बार उठेंगे क़दम खुदा की तरफ
बस एक बार चले आओ मुस्तफा की तरफ
ऐसे है सरकार मेरे ऐसे हैं सरकार
दिल से मुस्तफा को तू पुकार होगा बेडा पार
ग़म सभी राहत-ओ-तस्कीन मै ढल जाते हैं
जब करम होता है हालात बदल जाते है
कोइ देखे तोह कहीं उनकी दोहाई देकर
या मुहम्मद से तो पथर भी पिघल जाते हैं
ऐसे हैं सरकार मेरे ऐसे हैं सरकार
दिल से मुस्तफा को तू पुकार होगा बेडा पार
कोइ आ जये तलब से भि सिवा देते हैं
आये बीमार तो हर दुख की दवा देते हैं
गालियाँ दैता है कोइ तो दुआ देते हैं
दुश्मन आजाये तो चादर भी बिछा देते हैं
ऐसे हैं सरकार मेरे ऐसे हैं सरकार
दिल से मुस्तफा को तू पुकार हो गा बेडा पार
दुआ को बाब-ए-असर से गुज़ार कर दैखो
दर-ए-नबी पे खुदा को पुकार कर दैखो
शुमार हो नहीं सकते शुमार शुमर कर दैखो
तुम उनसे दूर हो लेकिन वोह तूम से दूर नही
यक़ीन ना आये तो उन को पुकार कर दैखो
ऐसे हैं सरकार मेरे ऐसे हैं सरकार
दिल से मुस्तफा को तू पुकार हो गा बेडा पार
देख लो धूप मदीने का पता देती है
ईश्क़ वालों को तो गर्मि भि मज़ा देती है
क्यों के सूरज की अगर एक किरन रोजाना

ख़ूब दीवार-ए-मदीना का मज़ा लेती है
ऐसे हैं सरकार मेरे ऐसे हैं सरकार
दिल से मुस्तफा को तू पुकार हो गा बेडा पार
ऊन कि रेह्मत नै तो कतरे को दरिया कर डाला
खाली दामन जिसका देखा उसको भी भर डाला
मांगने गए भीक तो हम को गणी कर दला
ऐसे हैं सरकार मेरे ऐसे हैं सरकार
दिल से मुस्तफा को तू पुकार हो गा बेडा पार



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