farhan ali qadri
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Farhan Ali Qadri - ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
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ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद

ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
दर पे मुझे बुलाना सरकार हो जियारत मुझे जीते जी मदीना
लोगों ने हाजरी दी मेरी न आई बारी
अब तो पुकार सुनलो बीती है उम्र सारी
तेरी चाहतों से आक़ा येह भर गया है सीना
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
दर पे मुझे बुलाना सरकार हो जियारत मुझे जीते जी मदीना
दिन रात मेरे सर पे मुश्किल है आयी मुश्किल
तेरी याद मैं जो तडपे क्या अजीब हो गि हर दिल
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
दर पे मुझे बुलाना सरकार हो जियारत मुझे जीते जी मदीना
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
वोह सर्ज़मी मुक़दस आँखों से चूम लूँगा

जित्ना नसीब होगा उत्ना मै घूम लूँगा

इतना ज़रूर लिख देय क़िस्मत मै मैरा आना
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
दर पे मुझे बुलाना सरकार हो जियारत मुझे जीते जी मदीना
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
किस को सुनाएं अपनी ये दिल की दास्तानें
कोइ समझ ना पाये अपने हो या बेगाने
दिल की दवा ना जाने बेबस है यह ज़माना
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
दर पे मुझे बुलाना सरकार हो जियारत मुझे जीते जी मदीना
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
मै नै ना की है कोइ ऐसि कोइ इबादत
ख़ैरल पे मेरे मौला हो जाये यह इनायत
नाचीज़ सा हू बंदा मुझ को ना आजमाना
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद
दर पे मुझे बुलाना सरकार हो जियारत मुझे जीते जी मदीना
ईक बार या मुहम्मद इक बार या मुहम्मद


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