मुझ पे मौला का करम है उनकी नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ
मैं सदक़े या रसूल अल्लाह मैं सदक़े या हबीब अल्लाह
धूम उन की नातख्वानी की मचाते जाऐंगे
या रसूल अल्लाह का नारा लगाते जाऐंगे
नातख्वानी मौत भी हम से छुडा सकती नहीं
कब्र मैं भी मुस्तफा के गीत गाते जाऐंगे
मुझ पे मौला का करम है उनकी नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ
मैं सदक़े या रसूल अल्लाह मैं सदक़े या हबीब अल्लाह
कितना बडा है मुझ पे यह अहसाने मुस्तफा
कहते हैं लोग मुझ को सनाख़ाने मुस्तफा
मुझ पे मौला का करम है उनकी नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ
मैं सदक़े या रसूल अल्लाह मैं सदक़े या हबीब अल्लाह
कोई गुफ्तगू हो लब पर तेरा नाम आ गया है
तेरा ज़िक्र करते करते यह मुकाम आ गया है
जिससे पी के शैख़ सादी बलागल-उला पुकारे
बलागल-उलाबे कमालिही
क़शाफद्दुजाबे जमालिही
हसुनत जमीओ ख़िसालिही
सल्लू अलैहे व आलिही
मेरे दस्ते नातवां मैं वोही जाम आ गया है
मुझ पे मौला का करम है उनकी नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ
मैं सदक़े या रसूल अल्लाह मैं सदक़े या हबीब अल्लाह
ग़म नहीं छोड दे यह सारा ज़माना मुझ को
मेरे आक़ा तो हैं सीने से लगाने के लिये
बक़्श दी नात की दौलत मेरे आक़ा ने मुझ को
कितना प्यारा है वसीला सरकार को पाने के लिए
मुझ पे मौला का करम है उनकी नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ
मैं सदक़े या रसूल अल्लाह मैं सदक़े या हबीब अल्लाह
सीने मैं भरा हाय तेरी नातों का खजाना
आलम पे लुटता हूँ कमी तेरे दर की
मुझ पे मोला का करम हाय उनकी नातिन पढ़ता हूँ
दमन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ
मैं सदके या रसूल अल्लाह मैं सदके या हबीब अल्लाह
आवाज़ उबैद तेरी बा फैज़ाने नात ही
सीनों मैं आशिक़ाने नबी के उतर गई
मुझ पे मौला का करम है उनकी नातें पढ़ता हूँ
दामन अपना रब की रहमत से मैं हर दम भरता हूँ
मैं सदक़े या रसूल अल्लाह मैं सदक़े या हबीब अल्लाह