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नहीं मालूम कैसा था मकान कल शब् जहाँ में था
नमी दानम चेह मंजिल बूद , शब् जाये कह मूं बोदम
बह हर सु रक्स इ बिस्मिल बूद , शब् जाये कह मूं बोदम
परी पैकर निगारे , सर्वे कादय लाला रुख्सरय
सरापा आफत ए दिल बूद , शब् जाये कह मूं बोदम
नहीं मालूम कैसा था मकान कल शब् जहाँ में था
हसीन पैकर जसामत सर्वे सा क़द फूल से रुखसार
सरापा हुस्न था दिल पर एयाँ कल शब् जहाँ में था
राकीबन गोश बार आवाज़ , ओऊ दर नाज़न , मी तरसान
सुखन गुफ्तन चेह मुश्किल बूद , शब् जाये कह मूं बोदम
खुदा खुद मीर ए मजलिस बूद अन्दर ला मकान खुसरो
मुहम्मद शाम ए महफ़िल बूद , शब् जाये कह मूं बोदम
उजागर ला मकान में खुद खुदा था साहिब ए महफ़िल
नबी थे शाम ए बज़्म ए ला मकान कल शब् जहाँ में था
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