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महफ़िल -ए- मिलाद करने की लगन ज़िंदा रहे
महफ़िल -ए- मिलाद करने की लगन ज़िंदा रहे
आशिकान -ए- मुस्तफा का ये चलन जिंदा रहे
हर तरफ नारे ही नारे आमद -ए- सरकार के
सुन्नियों का लेहलहता ये चमन जिंदा रहे
चारसू खुशियाँ ही खुशियाँ आपके आने की है
या नबी जशन - ए - विलादत की लगन जिंदा रहे
हम मानते ही रहेंगे उनके आने की ख़ुशी
दुश्मन - ए - जशन - ए -विलादत की जलन जिंदा रहे
नात के अशार सुनकर ये कहा सरकार ने
ता उमर जारी तुम्हारा ये लहन जिंदा रहे
ज़िन्दगी बेकार है जो हो न इश्क - ए- मुस्तफा
या खुदा इश्क - ए - मोहम्मद की अगन जिंदा रहे
ये शहीदों के लहू की दोस्तों आवाज़ है
मर गए जो आप पर उनके बदन जिंदा रहे
हम है नामूस - ए - नबी के पासबान है पासबान
उनपे जान कुर्बान करने का वचन जिंदा रहे
मुझको दे तासीर मौला और कलम में रौशनी
ऐ उजागर शायरी का यह फन जिंदा रहे
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