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बारवीं तरीक में हक़ का जमाल आया नज़र
बारवीं तरीक में हक़ का जमाल आया नज़र
आमिना की गोद में एक बेमिसाल आया नज़र
मुस्कुराये है बहारें इन्बिसात ओ कैफ की
जब बनु हाशम में अब्दुल्लाह का लाल आया नज़र
रहमत-उल-आलमीन कि आमद आमद पर निसार
दर्द ओ दुःख में हर जगह रेह्मत फज़ाल आया नज़र
चाँद उसके इक इशारे पर खिलौना बन गया
मोहम्मद में जब आमिना बीबी का लाल आया नज़र
आपके नक़्श-ए-क़दम मै सारे फित्नौ से नजाद
आप ही के रास्ते में एतेदाल आया नज़र
कहते थे हजरत उम्र सरदार उस को शौक से
जब कबी तैबा की गलियों में बिलाल आया नज़र
मुर्दा क़ौमौ मै उजागर ज़िन्दगी की लहर दी
आपकी बातों में वोह ऊज-ए-कमाल आया नज़र
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