|
मेरी बात बन गई है तेरी बात करते करते
मेरी बात बन गई है तेरी बात करते करते
तेरे शहर में मैं आऊँ तेरी नात पड़ते पड़ते
तेरे इश्क की बदोलत मुझे ज़िन्दगी मिली है
मुझे मौत आका आये तेरा ज़िक्र करते करते
किसी चीज़ की तलब है न है आरज़ू भी कोई
तुने इतना भर दिया है कश्कोल भर्त्य भर्तय
मेरे सूने सूने घर में कभी रोनाकें अता हों
में दीवाना हो गया हूँ तेरी राह तकते तकते
है जो जिंदगानी बाक़ी ये इरादा कर लिया है
तेरे मुन्करों से आक़ा मै मारूंगा लडते लडते
नासिर की हाजरी हो कभी आस्तां पे तेरे
के ज़माना हो गया है मुझे आन्हें भर्तय भर्तय
|