|
ज़िक्र-ए-रसूल-ए-पाक सुनायेंगे झूम झूम
ज़िक्र-ए-रसूल-ए-पाक सुनायेंगे झूम झूम
जश्न-ए-विलादत उन का मनायेंगे झूम झूम
सईद मर्हबा हुज़ूर की आमद का जशन है
हम शहर ओ बस्ति बस्ति सजायेंगे झूम झूम
मिलाद-ए-मुस्तफा के निकलेंगे हम जलूस
नारा नबी का मिल के लगायेंगे झूम झूम
दाता सखी करीम रऊफ ओ रहीम है
सद्क़ा उन्हीं के नाम का खायेंगे झूम झूम
रखो तसल्ली उनका करम हो गा एक दिन
रिज्वी आप भी मदीने जायेंगे झूम झूम
|