farhan ali qadri
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Farhan Ali Qadri - हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
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हम को बुलाना या रसूलुल्लाह

हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या हबीब अल्लाह
कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
तरप उठेगा ये दिल या धडकना भूल जाऐगा
दिले बिस्मिल का इस दर पर तमाशा हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या हबीब अल्लाह
अदब से हाथ बाँधे उन के रौजे पर खडे होंगे
सुनहरी जालियों का यूँ नज़ारा हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
दरे दौलत से लौटाया नहीं जाता कोई खाली
वहाँ खैरात का बँटना खुदाया हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या हबीब अल्लाह
बरसती गुम्बदे ख़जरा से टकराती हुई बूँदें
वहाँ पर शान से बारिश बरसना हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
गुज़ारे रात-दिन अपने इसी उम्मीद पर हम ने
किसी दिन तो जमाले रोये जेबा हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
दमे रुखसत क़दम मन भर के हैं महसूस करते हैं
किसे है जा के लौट आने का यारा हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
पहुँच जाऐंगे जिस दिन ऐ उजागर उन के कदमों में
किसे कहते हैं जन्नत का नज़ारा हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
कभी तो सब्ज़ गुम्बद का उजाला हम भी देखेंगे
हमें बुलवाऐंगे अक़ा मदीना हम भी देखेंगे
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह
हम को बुलाना या रसूलुल्लाह

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