farhan ali qadri
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Farhan Ali Qadri - माँ तेरे प्यार का हक़ हम से अदा क्या होगा
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माँ तेरे प्यार का हक़ हम से अदा क्या होगा

माँ तेरे प्यार का हक़ हम से अदा क्या होगा
माँ मेरी माँ
तू जो नाराज़ हो ख़ुश हम से ख़ुदा क्या होगा
तूने औलाद पे क्या कुछ कुर्बान नहीं किया
अपनी नींदें हमें दीं अपना वो सुख चैन दिया
लोग करते थे अगर तुझ से शिकायत मेरी
जान पर खेल के करती थी हिफाज़त मेरी
जब कोई मुझ को सताए तो बिगड़ जाती थी
मेरी खातिर कभी झगडे पे उतर जाती थी
मेरी साँसों में मौजूद है ख़ुशबू बन कर
मेरी रातों में चमकती है तू जुगनू बन कर
तेरा दिल तोड के बेटों का भला किया होगा
माँ तेरे प्यार का हक़ हम से अदा किया होगा
याद आती हैं अभी तक मुझे बातें तेरी
मेरे रोने से छलक जाती थीं आँखें तेरी
तू मुझे रोता हुआ देख के रो देती थी
अपना सुख चैन मेरे वास्ते खो देती थी
फिर दुआऐं मुझे दे दे मैं सँवर जाऊँगा
तू यूँ ही रोती रहेगी तो मैं मर जाऊँगा
होगा अहसान गले बढ़ के लगा ले मुझको
अपनी ममता भरी जन्नत में छुपा ले मुझको
यही इक रास्ता और इस के सिवा क्या होगा
मान तेरे प्यार का हक़ हम से अदा क्या होगा
तेरी अज़मत को किया बढ़ के फरिश्तों ने तवाफ़
और क़दम मैने उठाऐ तेरी मर्ज़ी के ख़िलाफ
कितना बदबख्त हूँ फरमाने ख़ुदा भूल गया
मैं जवां होते ही अहसान तेरा भूल गया
जानता हूँ के ख़ताकार गुनाहगार हूँ मैं
तू ख़फा है तो मुसीबत में गरिफ्तार हूँ मैं
मुआफ कर दे मुझे फिर बढ़ के सहारा दे दे
माँ मेरी ड़ूबती कश्ती को किनारा दे दे
वरना मुझ जैसा गुनाहगार कोई क्या होगा
माँ तेरे प्यार का हक़ हम से अदा क्या होगा
लोग औरों के लिए माँ को भुला देते हैं
उस के जज्बात को सूली पे चढ़ा देते हैं
बूढ़े माँ बाप के जो काम नहीं आऐगा
अपनी औलाद से वो इस का सिला पाऐगा
यह अगर बिछड़े तो फिर हाथ कहाँ आऐंगे
रहमतों के लिए सौग़ात कहाँ पाऐंगे
हाँ अभी वक़्त है माँ बाप की ख़िदमत कर लो
नेकियाँ लूट लो और खुशियों से दामन भर लो
जाऐगा बस वही जन्नत में भी जो माँ का होगा
माँ तेरे प्यार का हक़ हम से अदा क्या होगा
वास्ता आदमो हव्वा का तुझे देता हूँ
वास्ता शाहे मदीना का तुझे देता हूँ
वास्ता देता हूँ हैदर की शुजाअत का तुझे
वास्ता फातिमा ज़हरा की इबादत का तुझे
तू जो खुश होगी तो खुश होंगे हुसैन और हसन
वरना वीराना रहेगा मेरे जीवन का चमन
ए मेरी माँ तू मेरा दूध न बख्शेगी अगर
आग दोज़ख की जलाऐगी मुझे रह रह कर
बाद मरने के ज़रा सोच मेरा क्या होगा
माँ तेरे प्यार का हक़ हम से अदा क्या होगा
माँ का दिल टूटे तो आवाज़ खुदा तक पहुचे
यह जो रोऐ तो फरिश्तों को भी रोना आए
माँ के दुःख दर्द को बेटा न अगर समझेगा
उस को जन्नत में खुदा भी नहीं जाने देगा
मेरे आका नहीं देंगे उसे जामे कौसर
रात दिन बरसेगी अल्लाह की लानत उस पर
चाहे हाफिज़ के हो हाजी या नमाज़ी आलिम
ऐसे बेटों से खुदा कैसे हो राजी आलम
जो भला न करेगा तो भला क्या होगा
माँ तेरे प्यार का हक़ हम से अदा क्या होगा
माँ मेरी माँ

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