farhan ali qadri
Home | Video | Audio | Albums | Latest Album | Gallery | Forum | Guest Book | Search | Tell A Friend | Contact
Title Bookmark and Share farhan ali qadri


Farhan Ali Qadri - क्या ख़बर क्या सज़ा मुझ को मिलती
        Hindi Lyric
  Audio   Roman   English   Hindi   Urdu

क्या ख़बर क्या सज़ा मुझ को मिलती

क्या ख़बर क्या सज़ा मुझ को मिलती
मेरे आक़ा ने इज्ज़त बचा ली
फर्दे इसियाँ मरी मुझ से ले कर
काली कमली में अपनी छुपा ली
वो अता पर अता करने वाले
और हम भी नहीं टलने वाले
जैसी ड़योढ़ी है वैसा भिखारी
जैसा दाता है वैसे सवाली
क्या ख़बर क्या सज़ा मुझ को मिलती
मेरे आक़ा ने इज्ज़त बचा ली
मैं गदा हूँ मगर उन के दर का
वो जो सुल्ताने कोनो मकां हैं
यह ग़ुलामी बड़ी मुस्तनद है
मेरे सर पे है ताजे बिलाली
क्या ख़बर क्या सज़ा मुझ को मिलती
मेरे आक़ा ने इज्ज़त बचा ली
मेरी उमरे रवां बस ठहर जा
अब सफ़र की ज़रूरत नहीं है
उन के क़दमों में मेरी जबीं है
और हाथों में रौजे की जाली
क्या ख़बर क्या सज़ा मुझ को मिलती
मेरे आक़ा ने इज्ज़त बचा ली
मैं मदीने से क्या गया हूँ
ज़िन्दगी जैसे बुझ सी गई है
घर के अन्दर फिज़ा सूनी सूनी
घर के बाहर समां खाली खाली
क्या ख़बर क्या सज़ा मुझ को मिलती
मेरे आक़ा ने इज्ज़त बचा ली
मैं गदागर हूँ मगर उन के दर का
वो जो सुल्ताने कोनो मकां हैं
यह ग़ुलामी बड़ी मुस्तनद है
मेरे सर पे है ताजे बिलाली
मैं फ़क़त नाम लेवा हूँ उन का
उन की तौसीफ मैं क्या करूंगा
मैं न इक़बाल खुसरो न सादी
मैं न कुदसी न जामी न हाली
क्या ख़बर क्या सज़ा मुझ को मिलती
मेरे आक़ा ने इज्ज़त बचा ली
फर्दे इसियाँ मरी मुझ से ले कर
काली कमली में अपनी छुपा ली

Copyright © 2007 - 2017 - Powered by Net is Host