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अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाहहू अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू
अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाहहू अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू
पुछा हवा से मै नै भला झूमती है क्यों
अम्बर को उडते उडते भला चूमती है क्यों
कहने लगी है हम्द-ए-ख़ुदा पढ़ा रही हूँ मैं
दामन को रहमतों से अभी भर रही हूँ मै
अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू अल्लाह हू
अम्बर से जब कहा बोहत ऊंचि है तेरी शान
बोला खुदा-ए-पाक का हर हुकम तू भी मान
मै नै कहा केह रब की करो हम्द कुछ बयां
बोला ख़ुदा कि ज़ात कहाँ मै भला कहाँ
अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू
पुछा क़मर से की तैरा हल्ल-ओ-क़ल्ल हय
आवाज़ आई मुझ मै तो रब का जमाल है
मै नै कहा क़मर से के आ तुझ को चूम लूं
बोला के हम्द पढ़ के ज़रा मै भि झूम लूं
अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू
मै नै कहा येह क़म्रि ओ बुल्बुल सय खुश नवा
पढ़ाती हो क्या सेहर को मुझे भी तो दो सुना
बोली के सुभा करते है हमद-ए-ख़ुदा से हम
आते नहीं है राह मै दुनिया के रंज-ओ-ग़म
अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू
बन्दों से प्यार मान से भी बढ़ कर ख़ुदा का है
मलिक वोह रूज़-ए-हश्र सज़ा-ओ-जज़ा का है
ताहिर का आसरा मेरे मौला तैरा करम
मेह्शर में आसिओण का तु रख लीजीओ भरम
अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू
अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू अल्लाहहू
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